Friday, March 1, 2024
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What is insurance and Types of insurance | बीमा क्या है और बीमा के प्रकार

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बीमा वित्तीय नियोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू है जो व्यक्तियों और व्यवसायों को अनिश्चित घटनाओं से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करता है। यह एक बीमा कंपनी और बीमित पक्ष के बीच एक अनुबंध है, जिसके तहत बीमा कंपनी नियमित प्रीमियम भुगतान के बदले विशिष्ट आकस्मिकताओं के मामले में वित्तीय मुआवजा प्रदान करने के लिए सहमत होती है।
बाजार में कई प्रकार की बीमा पॉलिसी उपलब्ध हैं, प्रत्येक अलग-अलग जरूरतों और आवश्यकताओं को पूरा करती है। आइए कुछ लोकप्रिय बीमा पॉलिसियों और उनके लाभों पर करीब से नज़र डालें।

Life Insurance:

जीवन बीमा को बीमाधारक के लाभार्थियों को उनकी मृत्यु के मामले में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अंतिम संस्कार की लागत, बकाया कर्ज और खोई हुई आय जैसे खर्चों को कवर करने में मदद करता है। जीवन बीमा पॉलिसी दो प्रकार की होती हैं: जीवन बीमा और संपूर्ण जीवन बीमा। टर्म लाइफ इंश्योरेंस एक विशिष्ट अवधि के लिए कवरेज प्रदान करता है, आमतौर पर 10 से 30 साल, जबकि संपूर्ण जीवन बीमा बीमाधारक के पूरे जीवनकाल के लिए कवरेज प्रदान करता है।

Health Insurance:

व्यक्तियों और उनके परिवारों को अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों से बचाने के लिए स्वास्थ्य बीमा आवश्यक है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने, चिकित्सा उपचार और प्रक्रियाओं की लागत शामिल है। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को व्यक्तिगत रूप से खरीदा जा सकता है या नियोक्ताओं द्वारा उनके कर्मचारी लाभ पैकेज के हिस्से के रूप में प्रदान किया जा सकता है।

Auto Insurance:

अधिकांश राज्यों में ऑटो बीमा अनिवार्य है और दुर्घटना की स्थिति में वाहन को होने वाले नुकसान और चालक और यात्रियों को लगी चोटों के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। ऑटो बीमा पॉलिसी चोरी, बर्बरता और प्राकृतिक आपदाओं के लिए भी कवरेज प्रदान कर सकती हैं।

Homeowners Insurance:

गृहस्वामी बीमा प्राकृतिक आपदाओं, चोरी, या अन्य कवर की गई घटनाओं के कारण घर और उसमें रखे सामान को हुए नुकसान और नुकसान के लिए कवरेज प्रदान करता है। संपत्ति पर किसी के घायल होने की स्थिति में यह देयता सुरक्षा भी प्रदान करता है।

Business Insurance:

व्यावसायिक बीमा अप्रत्याशित घटनाओं जैसे संपत्ति की क्षति, चोरी, देयता दावों और व्यावसायिक रुकावटों के कारण वित्तीय नुकसान के खिलाफ व्यवसायों के लिए कवरेज प्रदान करता है। व्यवसाय के मालिक विभिन्न बीमा पॉलिसियों में से चुन सकते हैं, जिनमें सामान्य देयता बीमा, पेशेवर देयता बीमा, संपत्ति बीमा और श्रमिकों का मुआवजा बीमा शामिल है।

विशिष्ट आवश्यकताओं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बीमा पॉलिसियों को भी अनुकूलित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यात्रा बीमा चिकित्सा आपात स्थिति, यात्रा रद्द होने और यात्रा के दौरान खोये हुए सामान के लिए कवरेज प्रदान करता है। पालतू पशु बीमा पालतू जानवरों के लिए पशु चिकित्सा व्यय और अन्य चिकित्सा उपचारों को कवर करता है।

बीमा की लागत कई कारकों के आधार पर भिन्न होती है, जिसमें पॉलिसी का प्रकार, कवरेज राशि, डिडक्टिबल्स, और बीमित व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य और जीवन शैली की आदतें शामिल हैं। पॉलिसी की शर्तों के आधार पर बीमा पॉलिसियों के लिए प्रीमियम का भुगतान मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक रूप से किया जा सकता है।

The Benefits of Insurance (बीमा के लाभ)

Financial Protection: बीमा अप्रत्याशित घटनाओं के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तियों और व्यवसायों पर वित्तीय नुकसान का बोझ न पड़े।

Risk Mitigation: बीमा पॉलिसी अनिश्चित घटनाओं से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करती हैं, जिससे व्यक्तियों और व्यवसायों को भयावह नुकसान के डर के बिना काम करने की अनुमति मिलती है।

Peace of Mind: यह जानना कि अप्रत्याशित घटनाओं के मामले में आपके पास बीमा कवरेज है, मन की शांति प्रदान कर सकता है और तनाव और चिंता को कम कर सकता है।

Investment Opportunities: कुछ बीमा पॉलिसियाँ, जैसे संपूर्ण जीवन बीमा, निवेश के अवसर प्रदान कर सकती हैं जो समय के साथ संपत्ति बनाने में मदद कर सकती हैं।

Legal Requirements: Certain types of insurance, such as auto insurance and workers’ compensation insurance, are mandatory by law.

Conclusion

बीमा वित्तीय नियोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू है जो अप्रत्याशित घटनाओं के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा और जोखिम कम करने का काम करता है। बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की बीमा पॉलिसियों के साथ, व्यक्ति और व्यवसाय अपनी अनूठी जरूरतों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने बीमा कवरेज को अनुकूलित कर सकते हैं। जबकि बीमा की लागत कई कारकों के आधार पर भिन्न होती है, बीमा कवरेज होने के लाभ प्रीमियम की लागत से कहीं अधिक होते हैं। एक प्रतिष्ठित बीमा कंपनी के साथ काम करना आवश्यक है ताकि सही बीमा पॉलिसी और कवरेज मिल सके जो आपकी आवश्यकताओं को पूरा करे और आपको और आपके परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करे।

भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने की खुदकुशी, वाराणसी के एक होटल में लगाई फांसी।

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DESK:-भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने आत्महत्या कर ली है. बताया जा रहा है कि सारनाथ थाना क्षेत्र के सोमेंद्र होटल में मॉडल और एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने फांसी लगाकर अपनी जान ले ली. फैन्स के लिए आकांक्षा का यूं जाना काफी शॉकिंग बात है. आज सुबह ही भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के साथ एक्ट्रेस का नया गाना रिलीज हुआ था.

भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने बनारस के एक होटल में आत्महत्या कर ली है. बताया जा रहा है कि सारनाथ थाना क्षेत्र के सोमेंद्र होटल में मॉडल और एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने फांसी लगाकर अपनी जान ले ली. आकांक्षा भदोही जनपद के चौरी थाना क्षेत्र के परसीपुर की निवासी थीं. भोजपुरी इंडस्ट्री का वो जाना माना चेहरा थीं.

आकांक्षा ने ‘वीरों के वीर’ और ‘कसम पैदा करने वाले की 2’ नाम की फिल्मों में काम किया था. आज, 26 मार्च को ही भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के साथ उनका नया गाना रिलीज हुआ है. इस गाने का नाम आरा कभी हारा नहीं है. फैन्स के लिए विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जिस आकांक्षा को उन्होंने आज नए गाने में देखा है, वो अब इस दुनिया में नहीं हैं. एक्ट्रेस ने ये कदम क्यों उठाया इस बारे में अभी पता नहीं चल पाया है. इस खबर के आने के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में शोक पसर गया है. सभी को इससे बड़ा झटका लगा है..

बचपन से था एक्टिंग का शौक

आकांक्षा दुबे तीन साल की उम्र में पेरेंट्स के साथ मुंबई शिफ्ट हुई थीं. उनके पेरेंट्स उन्हें आईपीएस अफसर बनाना चाहते थे, लेकिन उनका मन डांस और एक्टिंग में था. बचपन से ही उन्हें टीवी देखने पसंद था. इसी पैशन को फॉलो करने के बाद वो फिल्मी दुनिया में आई थीं. मुंबई में पढ़ाई करने के बाद आकांक्षा ने अपना करियर फिल्मों में शुरू किया था. उन्होंने बताया था कि उनकी दोस्त पुष्पांजलि पांडे ने इसमें उनकी मदद की थी.

NEWS CREDIT BY: GOLU RAJ

“जो अन्न-वस्त्र उपजायेगा, अब सो क़ानून बनायेगाये भारतवर्ष उसी का है, अब शासन वहीं चलायेगा।”

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स्वामी सहजानंद सरस्वती जी का जन्म 22 फरवरी 1889 के शुभ महाशिवरात्रि के दिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के देवा गांव में हुआ।

Desk:- इस क्रांतिकारी नारे के साथ जो छवि उभर कर मन में आती है, वह छवि एक ऐसे दंडी सन्यासी की है जिन्होंने रोटी को पैदा करने वाले किसान को भगवान से भी बढ़कर माना था, ऐसा व्यक्तित्व जिन्हें भारत में किसान आंदोलन शुरू करने का पूरा श्रेय जाता है | एक ऐसा दंडी संन्यासी जिसे भगवान का दर्शन भूखे, अधनंगे किसानों की झोपड़ी में होता है, जो परंपारनुपोषित सन्यास धर्म का पालन करने की बजाय युगधर्म की पुकार सुन भारत माता को ग़ुलामी से मुक्त कराने के संघर्ष में कूद पड़ता है, लेकिन अन्न उत्पादकों की दशा देख अंग्रेज़ी सत्ता के भूरे दलालों अर्थात देशी ज़मींदारों के ख़िलाफ़ भी संघर्ष का सूत्रपात करता है।

स्वामी सहजानंद सरस्वती जी का जन्म 22 फरवरी 1889 के शुभ महाशिवरात्रि के दिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के देवा गांव में हुआ। वे आदि शंकराचार्य सम्प्रदाय के ‘दसनामी संन्यासी’ अखाड़े के दण्डी संन्यासी थे, साथ में एक कुशल किसान नेता, बुद्धिजीवी, लेखक, समाज सुधारक, क्रांतिकारी और इतिहासकार भी थे। उनके साथ कदम से कदम मिलाकर किसान संघर्ष को आगे बढ़ाने में सर्वश्री एम जी रंगा, ई एम एस नंबूदरीपाद, पंड़ित कार्यानंद शर्मा, पंडित यमुना कार्यजी जैसे वामपंथी और समाजवादी नेताओं की महती भूमिका थी| आचार्य नरेन्द्र देव, राहुल सांकृत्यायन, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, पंडित यदुनंदन शर्मा, पी. सुन्दरैया और बंकिम मुखर्जी जैसे तब के कई नामी चेहरे भी किसान सभा से जुड़े| नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ भी वे अनेक रैलियों में शामिल हुए। आज़ादी की लड़ाई के दौरान जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो नेताजी ने पूरे देश में ‘फ़ारवर्ड ब्लॉक’ के ज़रिये हड़ताल कराया। उनकी प्रमुख रचनाओं में सनातन धर्म के जन्म से मरण तक के संस्कारों पर आधारित “कर्मकलाप” नामक 1200 पृष्ठों की विशाल ग्रन्थ शामिल है। काशी के कुछ पंडितों द्वारा उनके सन्यास पर सवाल उठाने व यह कहने कि ब्राह्मणेतर जातियों को दण्ड धारण करने का अधिकार नहीं है, ऐसी कथन को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए उन्होंने विभिन्न मंचों पर शास्त्रार्थ करके यह प्रमाणित किया कि भूमिहार, ब्राह्मण समुदाय के अभिन्न अंग हैं और हर योग्य व्यक्ति सन्यास ग्रहण करने की पात्रता रखता है, साथ ही उन्होंने भूमिहार ब्राह्मण परिचय नामक ग्रंथ लिखा जो आगे चलकर “ब्रह्मर्षि वंश विस्तार” के नाम से सामने आया।

जमींदारी प्रथा के खिलाफ उनके संघर्ष ने जमींदारों द्वारा छोटे किसानों व मजदूरों के शोषण को राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया। किसानों की दुर्दशा को देखकर भिक्षुक साधु स्वामी सहजानंद सरस्वती जी का दिल कांप उठा था और उन्होंने 1927 में बिहटा के श्री सीताराम आश्रम पर वेस्ट पटना किसान सभा बुलाई जो आगे चलकर 1929 में सोनपुर में हुए किसानों के वार्षिक जमावड़े में “बिहार प्रोविंशियल किसान सभा” का रूप ले लिया। बी.पी.के.एस. ने किसानों के कई मसलों को अपने हाथ में लिया और जुझारू संघर्ष चलाया, स्वामी सहजानंद सरस्वती जी के निजी सहायक त्रिपुरारी शर्मा सुधारक के अनुसार स्वामी जी के नेतृत्व में बी.पी.के.एस. ने उन चार प्रमुख मसलों को लिया जो किसानों की जिंदगी में व्यापक तबाही मचाये हुये थे, यह थे:

  • हराई (जुताई) हराई के तहत बात यह थी कि सबसे पहले किसानों को अपने खेत में हल ले जाने से पहले जमींदारों के खेतों को जोतना था|
  • बेगारी (बिना कुछ लिए श्रम करा लेना) जमींदार मजदूरी दिए बिना श्रमिकों से सेवाएं लेना चाहते थे|
  • नाजायज वसूली (गैरकानूनी ढंग से यानी जबरन उगाही)
  • मुफ्तखोरी (छिनैती), किसानों से सब्जी, दूध, आदि जैसी वस्तुओं को मुफ्त में मांगी जाती थी, जबरदस्ती छीन ली जाया करती थी |
    बी.पी.के.एस. का दस्तावेज यह खुलासा करता है कि ऐसे नाजायज कर शाहाबाद में 20 तरह के, मसौढा परगना में 9 और गया जिले में 24 प्रकार के रहे |
    बी.पी.के.एस. ने बहुत से भूमि सुधार आंदोलनों की शुरुआत कर उनका नेतृत्व किया| मध्य बिहार की कृषि संबंधी ढांचे पर इन आंदोलनों का एक व्यापक प्रभाव पड़ा है| कुछ ज्यादा प्रभावशाली आंदोलनों में शुमार हैं, 1936-38 के दौरान बड़हिया, ताल, रेवड़ा, मजियावाना और अमवारी में हुए बकाश्त आंदोलन और 1938-39 के बीच बिहटा की डालमिया शुगर फैक्ट्री में चलाया गया आंदोलन| इनमें किसानों और मजदूरों ने एक साथ मिलकर लड़ाई लड़ी| परिणाम यह निकला कि डालमिया को हारना पड़ा, पूरे मन से लगकर संघर्ष तो शाहाबाद, सारण, दरभंगा, पटना, चंपारण और भागलपुर जिलों में भी छेड़े गये लेकिन इनमें से ज्यादा जुझारू किसान संघर्ष रहा, वह था बड़हिया ताल का बकाश्त आंदोलन जो कई साल तक चलता रहा| 1947 में आयोजित किए गए बी.पी.के.एस. के 12वें सम्मेलन के दौरान अपने अध्यक्षीय भाषण में कार्यानंद शर्मा ने बताया था कि इस किसान आंदोलन ने रोजी, आजादी और इज्जत (भोजन, स्वतंत्रता और स्वाभिमान) की लड़ाई लड़ी है।

किसान सभा पहले अपने प्रस्ताव के मुताबिक ‘वर्गीय सहयोगी’ की भूमिका में थी लेकिन किसान संघर्षों से हुए अनुभव ने इसे वैचारिक युक्ति-चाल में बदलने की दिशा प्रदान की| स्वामी जी ने बाद में लिखा कि जमींदारों के अत्याचारों को अपनी आंखों से देखने के बाद उन्होंने किसानों और जमींदारों के बीच समन्वय समरसता लाने की मनसा को छोड़ दिया और नए विकल्प की तलाश में लग गए| दस्तावेज बताते हैं कि बी.पी.के.एस. के तले आने वाले निचले तबकों के लोगों में किसी भी तरह का सांप्रदायिक दुराव-भेदभाव नहीं था और महिलाएं भी किसान संघर्षों में भाग लेती थीं। किसान सभा ने वर्ग संघर्ष को ध्यान में रखकर सोंचना और बोलना शुरु कर दिया था ताकि कृषि मजदूर और गरीब किसान अपनी प्रभावी भूमिका को कारगर ढंग से अदा करें, अपने सामाजिक-आर्थिक हितों के मद्देनजर समाज का निचला तबका सचेत था और यह लोग वर्गीय चेतना से लैस होते गये।

बी.पी.के.एस. संगठन में भूमिहार किसानों की बहुलता के बावजूद समय गुजरने के साथ खेतिहर मजदूरों के संघर्ष की लड़ाई के लिए ठान ली| श्री स्वामी सहजानंद सरस्वती किसान हित के मुद्दों पर सरदार पटेल और गांधीजी जैसे कद्दावर व्यक्तित्व के सामने भी नतमस्तक नहीं हुए, सरदार पटेल जी जैसे नेताओं ने जमींदारों को उचित मुआवजा दिए जाने का जब सवाल उठाया तो सहजानंद सरस्वती और किसान सभा ने घोषणा कर दी कि जमींदारों को किसी तरह का मुआवजा दिया जाना वैध-डकैती है, स्वामी जी ने बड़े जमींदारों को मुआवजा दिए जाने के प्रस्तावित योजना को जोरदार ढंग से नकारते हुए कहा:
“यह कहा गया कि बड़े जमींदारों की भूमि तभी ली जानी चाहिए जब तक कि उन्हें अधिक मुहावजा न दिया जाए, यह बात बिल्कुल ठीक है लेकिन मेरा दिमाग इसे समझने में बिल्कुल नाकाम है कि ऐसा किस प्रकार से संभव है| ऐसा करने में 50 साल लगेंगे….इसके लिए हमें 50 करोड़ रूपये की जरूरत होगी।“
स्वामी सहजानंद सरस्वती और गांधीजी के बीच वह अंतर भी उन्हीं मौलिक विभेदों की ओर इंगित करते हैं जो आमूल परिवर्तनकारी भूमि सुधारवादी आंदोलनों और वैसे शांतिपूर्ण किसान-संघर्षों के बीच मौजूद रहे हैं| गांधीजी ने भूमि सम्बन्धी प्रतिरोध शांति से चलाने की वकालत की जबकि श्री स्वामी जी ने नारा दिया था, “कैसे लोगे मालगुजारी, लट्ठ हमारा ज़िन्दाबाद”, समय के साथ यही नारा किसान आंदोलन का सबसे प्रिय नारा बन गया| स्वामी सहजानंद सरस्वती जी ने कहा कि अत्याचारी लोग शांतिप्रियता की भाषा नहीं समझते हैं हालांकि स्वामी सहजानंद का दंड स्वभाव में धार्मिक था लेकिन तब तक यह एक आर्थिक और राजनीतिक हथियार बन चुका था।

जमींदारी प्रथा के ख़िलाफ़ लड़ते हुए स्वामी जी 26 जून ,1950 को मुजफ्फरपुर में महाप्रयाण कर गये। राष्ट्रकवि दिनकर के शब्दों में दलितों का संन्यासी चला गया। आज़ादी मिलने के साथ ही सरकार ने क़ानून बनाकर ज़मींदारी राज को खत्म कर दिया। मरणोपरांत ही सही स्वामी जी की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गयी, लेकिन किसानों को सुखी-समृद्ध और खुशहाल देखने की उनकी इच्छा पूरी न हो सकी। उनके निधन के साथ हीं भारतीय किसान आंदोलन का सूर्य अस्त हो गया। देश में किसानों के संगठन कई हैं, लेकिन एक भी नेता ऐसा नहीं है, जो किसानों में सर्वमान्य हो और जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हो। ऐसे समय में स्वामी सहजानंद और ज़्यादा याद आते हैं, जिन्होंने किसान को संगठित और शोषण मुक्त बनाने में अपना सम्पूर्ण जीवन बलिदान कर दिया।

ऐसे महान विभूति को उनके जयंती पर बारम्बार प्रणाम 🙏🙏

News Credit By:-Suraj Kant (Rukunpura)

अश्लील और जातिसूचक भोजपुरी गाने बजाने वालों की खैर नहीं, बिहार पुलिस ने जारी किया फरमान … होगी सख्त कार्रवाई।

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पटना:- बिहार में महाशिवरात्रि और होली पर अश्लील और जातिसूचक गाने बजाने वालों के खिलाफ बिहार पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी. बिहार पुलिस की ओर से इसके लिए फरमान भी जारी कर दिया गया है. बिहार पुलिस की विशेष शाखा के पुलिस अधीक्षक द्वारा राज्य के सभी डीएम एवं एसपी को पत्र भेजकर इन अश्लील भोजपुरी गीतों के कारण उत्पन्न समस्या से अवगत कराकर इससे निबटने के लिए कहा है.
वहीं एडीजे मुख्यालय जे.एस गंगवार ने शुक्रवार को राज्य के सभी लोगों से समाज में सदभावना बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि अश्लीलता सभ्य समाज के लिए सही नहीं है। गीत-संगीत या पब्लिक के बीच वैसे गाने बजाते हैं, जो लोगों की भावनाओं को उतेजित करती है या किसी वर्ग विशेष के लोगों को ठेस पहुंचाती हैं. कटाक्ष में शालीनता नहीं है. गानों के रूप में अश्लीलता परोसने वालों पर विधिसमत कार्रवाई की जाएगी.

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दरअसल, हाल के वर्षों के दौरान कई ऐसे भोजपुरी गाने सुनने को मिले हैं जिसमें जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपनी श्रेष्ठता साबित की जाती हैं. वहीं कुछ गानों में दूसरों को नीचा दिखाने के लिए जाति सूचक शब्दों या अश्लीलता भरे बोल रहते हैं. इस कारण कई बार न सिर्फ सामाजिक तनाव बढ़ता है बल्कि मामला लड़ाई तक पहुंच जाती है.
विशेष शाखा के एसपी ने 15 फरवरी 2023 को सभी जिलों को पत्र जारी किया है. पत्र में एसपी ने कहा है कि इन अश्लील भोजपुरी गीतों के माध्यम से गायकों के द्वारा महिलाओं का अपमान किया जाता है. गीतों के संवाद द्विअर्थी होते है. जाति विशेष का जिक्र कर भी उन्हें अपमानित किया जाता है. विशेष शाखा के एसपी को अब पता चला है कि कुछ गायकों द्वारा भोजपुरी गीतों से अनुसूचित जाति की गरिमा को भी ठेस पहुंचाया जाता है. ऐसे गायक अपने गीतों के माध्यम से किसी जाति का महिमामंडन करते है, तो किसी जाति को नीचा दिखाते है. इस तरह के गीतों से सामाजिक सद्भाव भी बिगड़ने की संभावना बनी रहती है.

NEWS CREDIT BY: SUSHANT KUMAR (JEHANABAD)

Adamjee Insurance Company

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Adamjee Insurance Company Limited is a leading insurance company in Pakistan, offering a range of insurance products and services to individuals and businesses. Some of the insurance products offered by Adamjee Insurance Company include:

Motor Insurance

Home Insurance

Health Insurance

Travel Insurance

Marine Insurance

Fire Insurance

Liability Insurance

Personal Accident Insurance

Engineering Insurance

Miscellaneous Insurance

These insurance products can be tailored to meet the specific needs of the customer, and the company’s team of experienced professionals is available to help clients make informed decisions about their insurance coverage. The company has a strong reputation for providing high-quality insurance products and services, and has been serving the needs of customers in Pakistan for many years.

सुबह देश राज्यों से बड़ी खबरें।

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1 PM मोदी आज महाराष्ट्र-गोवा दौरे पर, नागपुर में मेट्रो के पहले फेज का उद्घाटन करेंगे, गोवा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की देंगे सौगात
2 विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद पर पड़ोसी देश को दिया कड़ा संदेश, कहा- पाकिस्तान पर होना चाहिए वैश्विक दबाव
3 वंदे भारत एक्सप्रेस में होगा बदलाव, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले- चेयर कार वाली इस ट्रेन में जल्द होगी स्लीपर बर्थ
4 गरीब परिवार में जन्मे हिमाचल के नए मुख्यमंत्री होंगे सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुकेश अग्निहोत्री बनेंगे डिप्टी CM; आज होगा शपथ ग्रहण, राहुल, प्रियंका, खरगे जायेगें शपथग्रहण में
5 हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम में बस ड्राइवर थे सुखविंदर सिंह सुक्खू के पिता, खुद भी बेचा दूध; निगम पार्षद से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया
6 देश में महिला वोटर 48%, विधायक 15% भी नहीं, हिमाचल में 1, गुजरात में 15 महिला MLA; इसमें छत्तीसगढ़ टॉप
7 ‘गुजरात में जीत की वजह मोदी, हिमाचल में हार की वजह नियति’, बोले BJP नेता गडकरी
8 नागपुर यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर अपना रुख साफ करें: उद्धव ठाकरे
9 हिमाचल के झटके से संभली भाजपा, राजस्थान-कर्नाटक के लिए बनाया प्लान; MP पर भी नजर
10 डॉ. आंबेडकर पर बयान को लेकर बवाल, महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटील पर फेंकी गई स्याही; तीन हिरासत में
11 CM शिवराज का एक्शन, मंच से ही तीन अधिकारियों को किया सस्पेंड, सौभाग्य योजना फिर से शुरू करने का एलान
12 पीटी उषा भारतीय ओलंपिक संघ की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गईं. वे इस पद के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं.
13 IND vs BAN: भारत ने वनडे फॉर्मेट में दर्ज की अपनी तीसरी सबसे बड़ी जीत, बांग्लादेश को 227 रनों से हराया
14 FIFA WC: पेनल्टी पर गोल से चूके हैरी केन, इंग्लैंड बाहर, सातवीं बार सेमीफाइनल में पहुंची फ्रांस की टीम
15 अपने देश को सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंचा पाए दिग्गज खिलाड़ी रोनाल्डो, मोरक्को ने 1-0 से हराकर किया बाहर
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CM नीतीश कुमार ने विरोधियों पर साधा निशाना, बोले- एक जगह चुनाव हारने से कुछ खत्म नहीं हो जाता।

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PATNA :- जदयू प्रदेश कार्यालय में शनिवार काे आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुढ़नी में जदयू की हार का संदर्भ लेते हुए कहा कि एक जगह चुनाव हारने से सबकुछ खत्म नहीं होता है। सभी लोग आम लोगों से मिलें-जुलें और उनसे ठीक से बात करें।

अब बस एक और राज्य में मान्यता मिल जाए तो हो जाएंगे राष्ट्रीय दल

मुख्यमंत्री ने कहा कि जदयू को अभी दो राज्य में मान्यता है। हमें एक और राज्य में मान्यता जैसे ही मिलेगी कि हम राष्ट्रीय पार्टी हो जाएंगे।

हम जिस घर में जाएंगे, वहां हमें समर्थ मिलेगा

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि हम अपने उद्देश्य में सफल हाेंगे। हम जिस घर में जाएंगे, वहां हमें समर्थन मिलेगा। आवश्यकता है हमें एक-एक घर तक पहुंचने की। हम सभी को मिलकर पार्टी को मजबूत करना है।

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(राज्य खाद्य आयोग सह राज्य कार्यकारिणी बिहार)

समाजवादी संस्कृति को जीवित रखने वाली पार्टी है जदयू।

राज्य खाद्य आयोग सह राज्य कार्यकारिणी बिहार के सदस्य नंदकिशोर कुशवाहा ने इस मौके पर कहां कि जदयू समाजवादी संस्कृति को जीवित रखने वाली पार्टी है। हम केवल महापुरुषों का नाम नहीं लेते; बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलते हैं। हमारे नेता नीतीश कुमार का देश में कोई मुकाबला नहीं।

Gmail Down: पूरी दुनिया में डाउन हुई गूगल की ईमेल सर्विस, यूजर्स हुए परेशान; ऐप और डेस्कटाप पर सेवाएं बाधित।

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New Delhi :- दुनिया भर के कई उपयोगकर्ताओं के लिए गूगल की ईमेल सर्विस जीमेल कई यूजर्स के लिए डाउन है। Gmail का ऐप और डेस्कटॉप संस्करण दोनों ही प्रभावित हुआ है। विश्वभर के कई उपयोगकर्ताओं के लिए जीमेल सेवाएं ठप पड़ गई हैं। हालांकि Google ने अचानक आए इस आउटेज को स्वीकार कर लिया है। मालू मालूम हो कि जीमेल के दुनिया भर में करीब 1.5 अरब से अधिक यूजर्स हैं। साल 2022 के दौरान सबसे जिस ऐप को सबसे अधिक बार डाउनलोड किया गया था उसमें से जीमेल भी एक है।

भारत में भी सेवाएं बाधित

मालूम हो कि पूरे भारत में इसके उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं ने ईमेल न मिलने और जीमेल ऐप के अनुत्तरदायी होने की शिकायत की। जीमेल की एंटरप्राइज सेवाएं भी फिलहाल प्रभावित हुई है। उपयोगकर्ता इसकी शिकायत के लिए ट्विटर का सहारा ले रहे हैं। ट्विटर पर देखने से ऐसा लगता है कि जीमेल का आउटेज दुनिया के कई देशों में है।  

दुनिया के कई देशों में जीमेल सेवाएं ठप।

ऐप और वेबसाइटों की ऑनलाइन स्थिति को ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर ने शनिवार शाम करीब सात बजे जीमेल की सेवाएं बाधित होने की जानकारी दी। शुरुआती में बेहद कम उपयोगकर्ताओं ने इसकी शिकायत की, लेकिन समय के साथ जीमेल ठप होने की शिकायतकर्ताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। डाउनडिटेक्टर वेबसाइट ने इस बारे में ट्वीट कर जानकारी दी है। हालांकि वेबसाइट ने यह नहीं बताया है कि आउटेज कितना व्यापक है। दुनिया में इसके उपयोगकर्ता ट्विटर के माध्यम से शिकायत कर रहे हैं।

7 से 8 बजे से Problem Start.

डाउनडिटेक्टर डॉट कॉम के मुताबिक जीमेल की सर्विस बाधित होने की समस्या शाम में करीब 7 बजे के आसपास आनी शुरू हुई. बाद में आठ बजे के करीब ये काफी ज्यादा बढ़ गई और दुनियाभर से इसे लेकर शिकायतें आने लगी. जीमेल डाउन होने की शिकायत को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया का रुख किया.

Himachal Pradesh/के नए मुख्यमंत्री होंगे सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुकेश अग्निहोत्री बनेंगे डिप्टी CM; कल होगा शपथ ग्रहण।

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Shimla :- कांग्रेस नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे और मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम की जिम्मदारी मिली है। राजभवन की ओर से जानकारी दी गई कि शपथ ग्रहण समारोह रविवार को यानी कि कल 1.30 बजे होगा। कल शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे शामिल होंगे। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सुखविंदर सिंह सुक्खू को सीएम बनाने का निर्णय लिया गया। बता दें कि राज्य में पहली  बार डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। इसके साथ ही, भूपेश बघेल, प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रतिभा सिंह और मनोनीत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्यपाल से मुलाकात की।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, ‘मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रदेश की जनता का शुक्रगुजार हूं। हमने हिमाचल प्रदेश की जनता से जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करना मेरी जिम्मेदारी है। राज्य के विकास के लिए हमें काम करना है।’ उन्होंने कहा, ‘डिप्टी सीएम के रूप में चुने गए मुकेश अग्निहोत्री और मैं एक टीम के रूप में काम करेंगे। मैंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 17 साल की उम्र में की थी। कांग्रेस पार्टी ने मेरे लिए जो किया है उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।’ सुक्खू को सीएम बनाए जाने पर उनके समर्थक खूब जश्न मना रहे हैं।

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भूपेश बघेल ने बताया कि हाईकमान ने आज सुखविंदर सिंह सुक्खू को कांग्रेस विधायक दल के नेता यानी मुख्यमंत्री के रूप में चयन किया है

सुक्खू मुख्यमंत्री और मुकेश अग्निहोत्री डिप्टी सीएम होंगे– भूपेश बघेल ने बताया कि हाईकमान ने आज सुखविंदर सिंह सुक्खू को कांग्रेस विधायक दल के नेता यानी मुख्यमंत्री के रूप में चयन किया है और उपमुख्यमंत्री के रूप में मुकेश अग्निहोत्री को चुना है। कांग्रेस के हिमाचल प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला ने कहा कि सर्वसम्मति से सारे विधायकों ने सुखविंदर सिंह सुक्खू को विधायक दल का नेता चुना है। कल उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। उपमुख्यमंत्री के रूप में मुकेश अग्निहोत्री को चुना गया है। ये आलाकमान का निर्णय है।

बिहार के दरभंगा में फिल्मी स्टाइल में हत्या, बदमाशों ने पत्नी के सामने पति को घर से खींचकर मारी गोली।

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दरभंगा। बिहार में अपराधियों के हौसले बुलंद है। आए दिन किसी न किसी जिले में हत्या, लूट, डकैती की खबर सामने आती है। अब ताजा मामला दरभंगा जिसले से सामने आया है। दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थानाक्षेत्र के झाझा गांव में बुधवार की शाम बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी। इससे पूरे दियारा क्षेत्र में सनसनी फैल गई। स्वजनों में कोहराम मच गया।

पीछा करने के बाद बदमाशों ने मारी गोली

बताया जाता है कि स्थानीय निवासी विनोद मुखिया(45) अपनी पत्नी रुणा देवी के साथ लगभग साढ़े चार बजे के घर के पास में मकई की फसल देखने के लिए खेत जा रहे थे। खेत पहुंचने से पहले ही आधा दर्जन बदमाशों ने पति-पत्नी को घेर लिया। हथियार देखकर पति-पत्नी किसी तरह से बदमाशों के चंगुल से निकले और गांव की ओर भागे। जान बचाने के लिए दोनों एक घर में छिप गए, लेकिन बदमाशों ने पीछा कर उस घर को चारो तरफ से घेर लिया। इसके बाद पत्नी के सामने में विनोद को घर से बाहर निकालकर सिर और सीने में गोली मार दी, जिससे उसकी मौत घटना स्थल पर ही हो गई।

एक साल पहले भाई की हुई थी हत्या

वारदात को अंजाम देने के बाद सभी बदमाश फायरिंग करते हुए फरार हो गए। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरे इलाके में दहशत व्याप्त है। घटना की सूचना पुलिस को दी गई है। बताया जाता है कि दियारा क्षेत्र होने के कारण पुलिस को पहुंचने में कई नदियों को पार करना होगा। इसमें तीन से चार घंटा का समय लगने की बात कही जा रही है। हालांकि, थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि पुलिस घटना स्थल के लिए रवाना हो गई है। पहुंचने पर पूरी घटना की जानकारी मिल पाएगी। आगे की कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि बदमाशों ने 10 अप्रैल 2022 को विनोद के भाई भरत मुखिया को गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस दौरान भी बदमाशों के निशाने पर विनोद था ।